ब्रह्मांड में असंख्य तारे, ग्रह, उपग्रह तथा अन्य खगोलीय पिंड पाए जाते हैं। हमारा Solar System सौरमंडल भी इन्हीं खगोलीय पिंडों का एक समूह है, जिसके केंद्र में Sun सूर्य स्थित है और सभी ग्रह इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। रात में आकाश में चमकने वाले Stars तारे, विभिन्न Constellation तारामंडल, Comet धूमकेतु, उल्का तथा कृत्रिम उपग्रह हमें अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने में सहायता करते हैं। इस अध्याय में हम सौर परिवार, ग्रहों, तारों, आकाशगंगा और ब्रह्मांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का अध्ययन करेंगे।
खगोलीय पिंड
आकाश में अनगिनत चमकदार पिंड दिखाई देते हैं जैसे- तारे, ग्रह, चंद्रमा, सूर्य आदि। इन पिंडों को खगोलीय पिंड कहते हैं।
• खगोलीय पिंडों और उनसे संबंधित परीघटनाओं के अध्ययन को ‘खगोलीकी‘ कहा जाता है।
चंद्रमा
चंद्रमा पूरे माह अलग-अलग आकृति यो में दिखाई देता है, इन्हें ‘चंद्रमा की कलाएं’ कहते हैं।
• जब चंद्रमा की पूर्ण चक्रिका दिखाई देती हैं, उस दिन को पूर्णिमा कहते हैं। इसके पश्चात प्रत्येक रात्रि को चंद्रमा का चमकीला भाग घटना जाता है।
• पन्द्रहवें दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, उसे दिन को अमावस्या कहते हैं।
• अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा का एक छोटा भाग आकाश में दिखाई देता है, उसे बालचंद्र कहा जाता है।
• एक पूर्णिया से दूसरी पूर्णिमा आने तक की अवधि 29 दिन से कुछ अधिक होती हैं। हिंदी पंचांग के अनुसार इस अवधि को एक माह कहते हैं।
चंद्रमा की कलाएं
• भारत में लगभग सभी पर्वो को चंद्रमा की कलाओं के अनुसार मनाया जाता है।
• दीपावली अमावस्या को बुद्ध पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती पूर्णिमा पर मनाई जाती है।
• महाशिवरात्रि पर्व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।
• बालचंद्र के दर्शन के अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
चंद्रमा की कलाओं को समझना
• चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। पृथ्वी चंद्रमा सहित सूर्य की परिक्रमा करती हैं।
• चंद्रमा का स्वयं का प्रकाश नहीं होता, यह सूर्य के प्रकाश को हमारी ओर परावर्तित करता है इसलिए, हम चंद्रमा के इस भाग को देख पाते हैं जिस भाग से सूर्य का परावर्तित प्रकाश चंद्रमा तक पहुंच सकता है।
चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री
• 21 जुलाई 1969 को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने सबसे पहले चंद्रमा पर अपने कदम रखे।
• उनके बाद एडमिन एडविन चंद्रमा पर उतरे।
चंद्रमा का पृष्ठ
• चंद्रमा का पृष्ठ धुल भरा तथा निर्जन है।
इस पर विभिन्न आमापों के गर्त हैं।
• इस पर बहुत से खड़ी ढाल वाले ऊंचे पर्वत भी हैं।
चंद्रमा पर न तो वायुमंडल हैं और न ही जल।
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तारे
रात्रि के समय में आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं। इनमें से कुछ तारे अधिक चमकीले दिखाई देते हैं जबकि कुछ कम चमकीले होते हैं।
तारे स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करते हैं यह ‘दीप्त पिंड‘ कहलाते हैं।
सूर्य भी एक तारा है परंतु तारे सूर्य की तुलना में लाखों गुना अधिक दूर हैं। इसलिए हमें बिंदु जैसे प्रतीत होते हैं।
पृथ्वी सूर्य से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है।
सूर्य के पश्चात दूसरा निकटतम तारा प्रॉक्सिमा सेंटूरी है। इसकी दूरी पृथ्वी से लगभग 4×10¹³ कि.मी. (40,000,000,000,000 कि.मी.) हैं।
इतनी अधिक दूरियों को लंबाई के अन्य मात्रक प्रकाश वर्ष में व्यक्त करते हैं। यह प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गई दूरी है।
• प्रकाश की चाल 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड है।
• सूर्य की पृथ्वी से दूरी लगभग 8 प्रकाश मिनट है।
तारामंडल
आकाश में विभिन्न आकृतियों वाले तारों के समूह को तारामंडल कहते हैं।
सप्तर्षि तारामंडल
सप्तर्षि एक विख्यात तारामंडल है उसे बिग डिपर, ग्रेड बियर अथवा ‘अर्सा मेजर’ भी कहते हैं।
• इस तारामंडल में सात स्पष्ट तारे होते हैं। यह बड़ी कलछी अथवा प्रश्नचिन्ह जैसा प्रतीत होता है।
इस कलछी की हत्थी में तीन तथा कटोरी में चार तारे होते हैं।
• सप्तर्षि सात प्रसिद्ध प्राचीन भारतीय संतों या ऋषियों के नाम के साथ संबंध है।
ओराॅयन तारामंडल
ओराॅयन तारामंडल सर्वाधिक भव्य तारामंडल में गिना जाता है। इसमें भी सात अथवा आठ चमकीले तारे होते हैं ओराॅयन को ‘शिकारी’ भी कहते हैं।
• इसके मध्य के तीन तारे शिकारी की बेल्ट को निरूपित करते हैं। चार चमकीले तारे चतुर्भुज के रूप में व्यवस्थित दिखाई देते हैं।
• आकाश में सबसे चमकीला तारा सीरियस है, जो ओराॅयन के निकट दिखाई देता है।
सौर परिवार या सौरमंडल
• सूर्य तथा इसकी परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंडों से मिलकर सौर परिवार बना है।
• इस परिवार में आठ गृह- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेप्ट्यून। अन्य पिंड धूमकेतु, क्षुद्रग्रह तथा उल्काएं शामिल है।
• सूर्य तथा इन पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के कारण यह पिंड सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं।
• पृथ्वी सहित सात अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं।
• सूर्य की दूरी के अनुसार इनके क्रम है
• सन 2006 तक सौर परिवार में नौ ग्रह थे। प्लूटो सौर परिवार का दूरतम ग्रह था।
• 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने प्लूटो को ग्रहण में शामिल नहीं किया, अब यह सौर परिवार का सदस्य नहीं है।
सूर्य
सूर्य हमसे निकटतम तारा है। यह विशाल मात्रा में ऊष्मा तथा प्रकाश उत्सर्जित करता है। पृथ्वी व अन्य ग्रहों पर प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है।
ग्रह
गृह तारों की भांति प्रतीत होते हैं परंतु ग्रहों का स्वयं का प्रकाश नहीं होता है।
• प्रत्येक ग्रह एक निश्चित पथ पर सूर्य की परिक्रमा करता है। इस पथ को ‘कक्षा’ कहते हैं।
• किसी भी ग्रह द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगे समय को उसे ग्रह का ‘परिक्रमण काल’ कहते हैं।
• ग्रहों की सूर्य से दूरी बढ़ने के साथ-साथ परिक्रमण काल में भी वृद्धि हो जाती है।
• सूर्य की परिक्रमा करने के साथ-साथ ग्रह अपने अक्ष पर घूर्णन गति भी करते हैं।
• किसी ग्रह द्वारा एक घूर्णन पूरा करने में लगने वाले समय को उसका ‘घूर्णन काल’ कहते हैं।
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सौर परिवार के ग्रह
बुध
• बुध सूर्य का सबसे निकटतम ग्रह है। यह सौर परिवार का लघुत्तम ग्रह है।
• सूर्योदय से तुरंत पूर्व अथवा सूर्यास्त के तुरंत पश्चात इसे क्षितिज पर देखा जा सकता है।
• बुध ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है।
शुक्र
• यह पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी हैं, यह सबसे अधिक चमकीला ग्रह है।
• इसे प्राय: प्रभात तारा (प्रातः तारा) अथवा सांध्य तारा कहते हैं, क्योंकि यह कभी-कभी सूर्योदय के उतर-पूर्वी आकाश में तथा सूर्यास्त के तुरंत पश्चात पश्चिमी आकाश में दिखाई देता है।
• शुक्र का कोई उपग्रह नहीं है।
यह पूर्व से पश्चिम की ओर अपने अक्ष पर घूर्णन करता है।
चंद्रमा की भांति शुक्र भी अलग-अलग कलाओं में दिखाई देता है।
पृथ्वी
• पृथ्वी सौर परिवार का एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन का अस्तित्व ज्ञात है।
• पृथ्वी पर जीवन संभव होने के लिए विशिष्ट पर्यावरण अवस्थाएं उत्तरदाई है। जैसे- पृथ्वी की सूर्य से उचित दूरी, सही ताप परिसर, जल की उपस्थिति, उपयुक्त वायुमंडल तथा ओजोन का आवरण आदि।
• अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी के पृष्ठ पर जल तथा भूमि से प्रकाश के परावर्तित होने के कारण यह नीली-हरी प्रतीत होती हैं।
• पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करती हैं, जो दिन-रात बनने के लिए उत्तरदाई हैं।
• पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुकाव ऋतु परिवर्तन के लिए उत्तरदाई हैं।
• पृथ्वी का केवल एक प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा है।
मंगल
• यह पृथ्वी की कक्षा के बाहर का पहला ग्रह है। यह रक्ताभ प्रतीत होता है इसलिए इसे ‘लाल ग्रह’ भी कहते हैं।
इसके दो छोटे प्राकृतिक उपग्रह हैं।
• मंगलयान: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत का पहला मंगल का कक्षित्र मिशन-मंगलयान, 5 नवंबर 2013 को प्रक्षेपित किया। यह 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया।
बृहस्पति
• यह शोर परिवार का सबसे बड़ा ग्रह है।
• लगभग 1300 पृथ्वियां इस ग्रह के भीतर रखी जा सकती हैं।
• बृहस्पति का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 318 गुना है। यह अपने अक्ष पर अत्यधिक तीव्र गति से घूर्णन करता रहता हैं।
शनि
• यह हल्के पीले रंग का ग्रह है।
• इसके चारों ओर रमणीय वलय इस सौर परिवार में अद्वित्तीय बनाते हैं।
यूरेनस तथा नेप्ट्यून
• यह सौर परिवार के बाह्यतम ग्रह है, शुक्र की भांति यूरेनस भी पूर्व से पश्चिम-दिशा में घूर्णन करता है।
• इसके घूर्णन अक्ष के झुका होने के कारण यह कक्षीय गति करते समय अपने पृष्ठ पर लुढ़कता सा प्रतीत होता है।
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उपग्रह
• ग्रहों की परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंडों को उपग्रह कहते हैं।
• चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है।
कृत्रिम उपग्रह
वे उपग्रह जो मानव द्वारा निर्मित है तथा पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, ‘कृत्रिम उपग्रह’ कहलाते हैं।
• भारत द्वारा छोड़ा गया प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट था।
• कृत्रिम उपग्रह का उपयोग मौसम की भविष्यवाणी, रेडियो तथा टेलीविजन संकेत के प्रेक्षण में किया जाता है।
इनका उपयोग दूरसंचार तथा सुदूर संवेदन के लिए किया जाता है।
अन्य उपग्रह-
इन्सैट उपग्रह (INSAT)
आई.आर.एस. (IRS)
कल्पना-1,
EDUSAT आदि हैं।
अन्य आकाशीय पिंड
ग्रहों से अतिरिक्त कुछ अन्य पिंड भी सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
क्षुद्रग्रह
मंगल तथा बृहस्पति की कक्षाओं के बीच एक बड़ा अंतराल है। इस अंतराल में छोटे-छोटे पिंड हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं इन्हें ‘क्षुद्रग्रह’ कहते हैं।
धूमकेतु
• धूमकेतु परवलीय कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। • • सामान्यतः धूमकेतु चमकीले सिर तथा लंबी पूंछ वाले होते हैं।
• जैसे-जैसे कोई धूमकेतु सूर्य के समीप आता है इसकी पूंछ आकार में बढ़ती जाती हैं।
• धूमकेतु समय-समय पर निश्चित अंतराल पर दिखाई देते हैं पहले का धूमकेतु लगभग हर 76 वर्ष के अंतराल में दिखाई देता है।
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उल्काएँ तथा उल्कापिंड
कभी-कभी आकाश में चमकीली धारी दिखाई देती हैं इस शूटिंग स्टार या टूटता तारा कहते हैं यद्यपि यह तारा नहीं है इन्हें ‘उल्का’ कहते हैं।
यह छोटे पिंड होते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं। वायुमंडलीय घर्षण के कारण यह तप्त होकर जल उठते हैं तथा शीघ्र ही वाष्पित हो जाते हैं।
कुछ उसका आकार में बड़ी होती हैं वह पूर्णतया वाष्पित होने से पूर्व पृथ्वी पर पहुंच जाती है। वह पिंड जो पृथ्वी पर पहुंचता है उसे ‘उल्का पिंड’ कहते हैं।
जब पृथ्वी किसी धूमकेतु की पूँछ को पार करती है तो उल्काओं के झुंड दिखाई देते हैं इन्हें ‘उल्कावृष्टि‘ कहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q.1 क्या आकाश में सारे तारे गति करते हैं? व्याख्या कीजिए।
नहीं, तारे आकाश में गति नहीं करते हैं परंतु उनकी स्थिति हमें परिवर्तित होती प्रतीत होती हैं। पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती हैं। इसलिए तारे हमें पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते प्रतीत होते हैं।
Q.2 तारों के बीच की दूरियों को प्रकाश वर्ष में क्यों व्यक्त करते हैं? इस कथन से क्या तात्पर्य है कि कोई तारा पृथ्वी से आठ प्रकाश वर्ष दूर है?
तारों के बीच की दूरियां बहुत अधिक होती हैं इसलिए इसे लंबाई के मात्रक प्रकाश वर्ष में व्यक्त करते हैं यह प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गई दूरी है।
यदि कोई तारा पृथ्वी से आठ प्रकाश वर्ष दूर है तो इसका तात्पर्य है कि उसे तारे में तारे से प्रकाश पृथ्वी पर आठ वर्ष में पहुंचेगा।
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