प्रकाश क्या है? कक्षा 8 विज्ञान हिंदी नोट्स

विज्ञान कक्षा 8 के अध्याय ‘प्रकाश’ (light) के स्वरूप में जानेंगे कि, प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जो हमें अपने आसपास की दुनिया को आसानी से समझने में सक्षम बनाता है। इसके साथ-साथ इस अध्याय में परावर्तन एवं अपवर्तन जैसी विभिन्न घटनाओं, परावर्तन के नियम, मानव आंख की संरचना एवं कार्यप्रणाली तथा भिन्न प्रकार के ‘प्रकाश’ के व्यवहार में प्रकाश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः विद्यार्थियों के इस प्रकाशिकी के सिद्धांतों के समाधान को स्पष्ट व्याख्या और मार्गदर्शन दिया गया है।

प्रकाश का परावर्तन

प्रकाश करने का दर्पण  या किसी अन्य चमकीली सतह से टकराकर पुनः  माध्यम में लौटने की घटना की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

परावर्तन के नियम

3.1 प्रकाश किरण: दर्पण से टकराने के पश्चात, प्रकाश- किरण दूसरी दिशा में परिवर्तित हो जाती है।

3.2 आपतित किरण: पृष्ठ पर पड़ने वाली प्रकाश- किरण को ‘आपतित किरण’ कहते हैं।

3.3 परावर्तित किरण: पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात वापस आने वाली प्रकाश- किरण को ‘परावर्तित किरण’ कहते हैं।

3.4 अभिलंब: दर्पण के जिस बिंदु पर आपतित किरण टकराती है उसे पर 90° का कोण  बनाते हुए रेखा खिंचने पर यह ‘अभिलंब’ कहलाती है।

3.5 आपतन कोण: आपतित किरण तथा अभिलंब के बीच के कोण को ‘आपतन कोण’ कहते हैं।

3.6 परावर्तन कोण: परावर्तित किरण तथा अभिलंब के बीच के कोण को  ‘परावर्तन कोण’ कहते हैं।

परावर्तन के नियम

प्रथम नियम: आयतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।

द्वितीय नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।

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नियमित तथा विसरित परावर्तन

नियमित परावर्तन: जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी समतल दर्पण पर आपतित होती हैं, तब परावर्तन के पश्चात भी किरणें एक दूसरे के समांतर होती हैं, ऐसे परावर्तन को ‘नियमित परावर्तन’ कहते हैं।

विसरित परावर्तन: जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी खुरदरे या अनियमित पृष्ठ पर आपतित होती हैं तथा परावर्तन के पश्चात समांतर नहीं होती हैं, अपितु अलग-अलग दिशाओं में परावर्तित हो जाती है, ऐसे परावर्तन को ‘विसरित परावर्तन’ कहते हैं।

आभासी प्रतिबिंब: जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता हैं  वह आभासी प्रतिबिंब कहलाता है

पार्श्व परिवर्तन: समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब में वस्तु का बायां भाग दाईं ओर तथा दायां भाग बाईं ओर दिखाई पड़ता है। इस परिघटना को पार्श्व परिवर्तन कहते हैं।

बहूपरावर्तन

बहुप्रतिबिंब: जब दो समतल दर्पण एक दूसरे के समांतर होते हैं तो उनके मध्य रखी वस्तु के अनंत प्रतिबिंब बनते हैं।

कैलाइडोस्कोप (बहुमूर्तिदर्शी)

आनत दर्पणों से बहुलित परावर्तन के सिद्धांत पर आधारित एक मनोरंजन युक्ति को कैलाइडोस्कोप (बहुमूर्तिदर्शी) कहते हैं।

सरंचना

जब एक दूसरे से किसी कोण पर रखे दर्पण द्वारा अनेक प्रतिबिंबों के बनने की धारणा का उपयोग बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप) में भांति-भांति के पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है।

कार्य सिध्दांत

• जब कैलाइडोस्कोप के छिद्र से झांकते हैं तो इसमें भिन्न-भिन्न पैटर्न दिखाई देते हैं।

• कैलाइडोस्कोप की एक रोचक विशेषता है कि आप कभी भी एक पैटर्न दोबारा नहीं देख पाएंगे।

श्वेत प्रकाश के घटक

• परावर्तित प्रकाश में हम अनेक रंग देखते हैं। प्रकाश के अपने रंगों में विभाजित होने को प्रकाश का विक्षेपण कहते हैं।

• इंद्रधनुष विक्षेपण को दर्शाने वाली एक प्राकृतिक परिघटना है।

• सूर्य का प्रकाश श्वेत प्रकाश के रूप में दिखाई देता है परंतु इसमें सात रंग होते हैं।

• प्रिज्म में से इस श्वेत प्रकाश को गुजरने पर यह अपने मूल सात रंगों लाल, नारंगी, पीले, हरे, नीले, जमुनी व बैंगनी में विभाजित हो जाता है। इसे वर्ण विक्षेपण कहते हैं।

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मनुष्य की नेत्र (आंख)

मनुष्य की आंख की आकृति लगभग गोलाकार होती है। आंख का बाहरी आवरण सफेद होता है। यह भाग कठोर होता है तथा आंख के आंतरिक भागों की सुरक्षा करता है।
इसके पारदर्शी अग्रभाग को कॉर्निया या स्वच्छ मंडल कहते हैं।

कॉर्निया के पीछे पेशियों की संरचना होती है जिसे ‘परीतारीका आइरिस’ कहते हैं।

आइरिस में एक छोटा सा द्वारा होता है जिसे ‘पुतली’ कहते हैं।

पुतली के साइज को परितारिका द्वारा नियंत्रित किया जाता है परीतारीका नेत्र को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं।

पुतली के पीछे एक उत्तल लेंस होता है। लेंस प्रकाश को आंख के पीछे एक परत पर फोकसित करता है। इस परत को रेटिना (दृष्टि पटल) कहते हैं।

रेटिना अनेक तंत्रिका कोशिकाओं का बना होता है। तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा अनुभव की गई संवेदनाओं को दृक् तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुंचा दिया जाता है।

तंत्रिका कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं।
• शंकु, जो तीव्र प्रकाश के लिए सुग्राही होती है।
• शलाकाएं, जो मंद प्रकाश के लिए सुग्राही होती है।


प्रमुख दृष्टि दोष

निकट दृष्टि दोष: इस दोष में दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देखा जा सकता। इस दोष को अवतल लेंस युक्त चश्मे में द्वारा दूर किया जाता है।

दूर दृष्टि दोष: इस दोष में पास की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देखा जा सकता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस युक्त चश्मे में का प्रयोग किया जाता है।

मोतियाबिंद: वृद्धावस्था में नेत्र दृष्टि धुंधली हो जाती है। यह नेत्र लेंस के धुंधला हो जाने के कारण होता है। इस दोष को शल्य चिकित्सा द्वारा दूर किया जाता है।

• विटामिन A की कमी से रतौंधी नामक रोग हो जाता है।

नेत्रहीन व्यक्तियों की उपलब्धियां

• नेत्रहीन युक्त दिवाकर नामक एक प्रतिभा संपन्न बालक में गायक के रूप में उपलब्धि हासिल की।
• जन्म से पूर्णतया नेत्रहीन युक्त श्री रविंद्र जैन ने इलाहाबाद से संगीत प्रभाकर की उपलब्धि प्राप्त की।
श्री लाल आडवाणी जो स्वयं नेत्रहीन युक्त हैं उन्होंने भारत में विकलांगों के पुनर्वास तथा विशिष्ट शिक्षा के लिए एक संस्था की स्थापना की।
अमेरिका की हेलेन ए, नेत्रहीन युक्त महिला है। यह एक प्रसिद्ध लेखिका एवं प्राध्यापिका है। इन्होंने “स्टोरी ऑफ माय लाइफ” (1903) अनेक पुस्तक लिखी।

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महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

Q.1 मान लीजिए आप एक अंधेरे कमरे में हैं। क्या आप कमरे के अन्दर की वस्तुओं को देख सकते हैं? क्या आप कमरे के बाहर वस्तुओं को देख सकते हैं? व्याख्या कीजिए
यदि आप एक अंधेरे कमरे में है तो आप कमरे की वस्तु को नहीं देख सकते क्योंकि वस्तुओं में परावर्तित प्रकाश हमारी आंख में नहीं पहुंच सकता है। परंतु कमरे के बाहर की वस्तुओं को देख सकते हैं क्योंकि बाहर की वस्तुओं से परावर्तित प्रकाश हमारी आंखों में पहुंच सकता है।

Q.2 नियमित तथा विसरित परावर्तन में अंतर बताइए। क्या विसरित परावर्तन का अर्थ है की, परावर्तन के नियम सफल हो गए?
नियमित परावर्तन: जब समांतर प्रकाश किरणे चिकने पृष्ठ जैसे समतल दर्पण से परावर्तित होने के पश्चात भी समांतर होती है तो ऐसे परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते हैं।

विसरित परावर्तन: जब समांतर प्रकाश किरणें किसी खुरदरे या अनियमित पृष्ठ से परावर्तित होने के पश्चात समांतर नहीं होती हैं तो ऐसे परावर्तन को विसरित प्रवर्तन कहते हैं।

नहीं, विसरित परावर्तन का अर्थ यह नहीं है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियमों का पूर्णत: पालन होता है। प्रकाश का विसरण परिवर्तित पृष्ठ की अनियमितताओं के कारण होता है।

Q.3 निम्न में से प्रत्येक के स्थान के सामने लिखिए यदि प्रकाश की एक समांतर किरण-पुंज इनसे टकराए तो नियमित परावर्तन होगा या विसरित परावर्तन होगा। प्रत्येक स्थिति में अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
(क) पाॅलिश युक्त लकड़ी की मेज- नियमित
(ख) चाॅक पाउडर- विसरित
(ग) गत्ते का पृष्ठ- विसरित
(घ) संगमरमर की फर्श पर फैला जल- नियमित
(ङ) दर्पण- नियमित
(च) कागज का टुकड़ा- विसरित

Q.4 परावर्तन के नियम बताइए।
परावर्तन के नियम निम्नलिखित हैं।
(1) आयतन को का मन सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।
(2) आपतित किरण, अभिलंब तथा परावर्तित किरण सदैव एक ही ताल में होते हैं।

Q.5 समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब होता है-
(अ) आभासी, दर्पण के पीछे तथा आवर्धित।
(ब) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज के बराबर।
(स) वास्तविक, दर्पण के पृष्ठ पर तथा आवर्धित।
(द) वास्तविक, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज के बराबर।
उत्तर- (ब) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज के बराबर।

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