कक्षा 8 विज्ञान जानिए कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ notes हिंदी में

प्रकृति में समय-समय पर स्वत: ही घटित होने वाली घटनाओं को प्राकृतिक परिघटनाएँ कहते हैं। इस अध्याय में हमें तड़ित (बिजली), भूकंप, चक्रवात, विद्युत आवेश, बाढ़ आदि शामिल हैं। ये घटनाएँ प्राकृतिक कारणों से होती हैं और कभी-कभी मानव जीवन तथा संपत्ति को प्रभावित करती हैं। इस अध्याय में मुख्य रूप से तड़ित (Lightning) और भूकंप (Earthquake) जैसी प्राकृतिक परिघटनाओं, उनके कारणों तथा सुरक्षा उपायों का अध्ययन किया जाता है।

तड़ित

तंडित एक विशाल स्तर की विद्युत चिंगारी होती हैं यह चिंगारी बादलों में आवेश एकत्रित होने के कारण पैदा होती हैं। इसे हम अपनी भाषा में बिजली कड़कना भी कहते हैं। यह अक्सर बरसात के समय देखने मिलती है।
प्राचीन काल में लोग इन चिंगारियां का कारण नहीं समझते थे तथा भगवान का क्रोध समझ कर डरते थे।
600 ईसा पूर्व से भी पहले यूनानियों का कहना था कि जब ऐम्बर को फर से रगड़ते हैं तो यह हल्की वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।
सन 1752 में अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजमिन फ्रैंकलिन (Benjamin Franklin) ने बताया कि तंडित तथा वस्त्रों उत्पन्न चिंगारी एक ही परिघटना है जो की आवेश अर्जित करने से उत्पन्न होती हैं।

आवेश

जब प्लास्टिक की रिफिल को पॉलिथीन से या प्लास्टिक की कंगी को सूखे बालों से रगड़ते हैं तो यह कुछ विद्युत आवेश अर्जित कर लेते हैं। इन वस्तुओं को आवेशित वस्तुएं कहते हैं।

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आवेशों के प्रकार

(1) धनावेश

सजातीय आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।
इलेक्ट्रॉनों की कमी के कारण उत्पन्न आवेश को धनावेश कहते हैं।

(2) ऋणावेश

इलेक्ट्रॉनों की अधिकता के कारण उत्पन्न आवेश को ऋणावेश कहते हैं।

विद्युतदर्शी

समान आवेश वाली पट्टियां एक दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं और वह फैल जाती हैं। अतः हम कह सकते हैं कि कोई वस्तु अवशोषित हैं अथवा नहीं। इस युक्ति को ‘विद्युत दर्शी’ कहते हैं।
पट्टियों को स्पर्श करने पर पन्नी की पट्टियों का आवेश हमारे शरीर से होकर पृथ्वी में चला जाता है तथा पट्टियां अवशोषित हो जाती हैं।

भूसम्पर्कण

किसी आवेशित वस्तु से आवेश को पृथ्वी में भेजने की प्रक्रिया को ‘भूसम्पर्कण’ कहते हैं।
विद्युत धारा के लीक होने से उत्पन्न विद्युत आघात से हमें बचाने के लिए भवनों में भूसम्पर्कण की व्यवस्था की जाती हैं।

तड़ित का निर्माण

गरज वाले तूफान बनते समय वायु की धाराएं ऊपर की ओर जाती है जबकि जल की बूंदे नीचे की ओर जाती हैं। जिसे हम बरसात भी कहते हैं।

इन प्रबल गतियां के कारण आवेशों का पृथक्करण होता है।
बादलों के ऊपरी किनारे के निकट धनावेश एकत्र हो जाते हैं। तथा ऋणावेश बादलों के निचले किनारे पर संचित हो जाते हैं। धरती के निकट भी देना आवेश का संचय होता है।
जब संचित आवेशों का परिणाम अत्यधिक हो जाता है तो वायु आवेशों के प्रवाह को नहीं रोक पाती हैं।
धनात्मक और ऋणात्मक आवेश मिलते हैं और प्रकाश की चमकीली धारियां तथा ध्वनि उत्पन्न होती हैं। इस प्रक्रिया को ‘विद्युत विसर्जन’ कहते हैं।
विद्युत विसर्जन की प्रक्रिया दो अथवा अधिक बादलों के बीच अथवा बादलों तथा पृथ्वी के बीच हो सकती हैं इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है परंतु सावधानी आवश्यक हैं।

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तड़ित से सुरक्षा

तंडित एवं झंझा (गरज वाले तूफान) के समय कोई भी खुला स्थान सुरक्षित नहीं होता।
• गरज सुनना किसी सुरक्षित स्थान पर तुरंत पहुंचने की चेतावनी है।
• अंतिम गर्जन सुनाई देने के बाद भी कुछ समय तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें और उसके बाद ही बाहर निकलें।

तड़ित चालक

तंडित चालक एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग भवनों को तंडित के प्रभावों से बचाने के लिए किया जाता है।
किसी भवन के निर्माण के समय उसकी दीवारों में, उस भवन की ऊंचाई से अधिक लंबाई की धातु की छड़ स्थापित कर दी जाती हैं।
धातु की छड़ विद्युत आवेश को जमीन तक पहुंचाने के लिए कुछ सरल पथ प्रदान करती हैं।

भूकंप

भूकंप के बारे में अभी भी सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं हो सका है। यह विशाल स्तर पर जनजीवन तथा संपत्ति को क्षति पहुंचा सकता है।
8 अक्टूबर 2005 को भारत में उत्तरी कश्मीर के उरी तथा तंगधार शहरों में एक बड़ा भूकंप आया था।
• इससे पहले 26 जनवरी 2001 को गुजरात के भुज जिले में भूकंप आया था।
• भूकंप बहुत कम समय के लिए पृथ्वी की भूपर्पटी के भीतर गहराई में हलचल के कारण उत्पन्न होता है।
• कम तीव्रता के भूकंप हर समय आते रहते हैं तथा कोई क्षति नहीं पहुंचते हैं।
• विशाल भूकंप बहुत कम होते हैं। यह भवनों, पुलों, बांधो तथा जनजीवन को असीम क्षति पहुंचा सकते हैं।
• भूकंप में बाढ़, भूस्खलन तथा सुनामी आ सकती हैं।

भूकंप का कारण

• पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह की गहराई में गड़बड़ के कारण या भूस्पन्द/भूकंपन आते हैं।
• पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत भूपर्पटी कहलाती हैं। यह टुकड़ों में विभाजित होती है।
• इसके प्रत्येक टुकड़े को ‘प्लेट‘ कहते हैं। यह प्लेट निरंतर गति करती रहती हैं।

भारत के भूकंप आशंकित क्षेत्र

भारत के भूकंप आशंकित क्षेत्र कश्मीर पश्चिमी तथा केंद्रीय हिमालय, समस्त उत्तर-पूर्व, कच्छ का रण, राजस्थान तथा सिंध गंगा के मैदान हैं।

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भूकंप तरंगें एवं भूकंपलेखी (सीस्मोग्राम)

भूस्पंद पृथ्वी की सतह पर तरंगे उत्पन्न करते हैं। इन तरंगों को भूकंप तरंगे कहते हैं। इन तरंगों को भूकंपलेखी नामक उपकरण (सीस्मोग्राम) द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है।

रिक्टर पैमाना

• किसी भूकंप की शक्ति के परिमाण की रिक्टर, पैमाने का रिक्टर, पैमाने पर परिमाण 7 से अधिक होता है।
• भुज तथा कश्मीर में आए भूकंपों का परिमाण 7.5 से अधिक था।

भूकंप से बचने के उपाय

1. यदि आप घर में हैं, तो
• किसी मेज के नीचे आश्रय लें तथा झटकों को के रुकने तक वही रहें।
• ऐसी ऊंची तथा भारी वस्तुओं से दूर रहे जो आप पर गिर सकती हैं।
• यदि बिस्तर पर हैं तो उठें नहीं अपने सर के तकिये से बचाव करें।

2. यदि आप घर से बाहर हैं, तो
• भवनों, वृक्षों तथा ऊपर जाती विद्युत लाइनों से दूर रहे और कहीं खुले स्थान को खोजें एवं धरती पर लेट जाएं।
• यदि कार अथवा बस में है, तो बाहर न निकले किसी खुले व सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास करें।

महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

Q.1. विद्युत आवेश क्या है? इसके प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर- किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की कमी या अधिकता के कारण उत्पन्न गुण को विद्युत आवेश कहते हैं।
इसके दो प्रकार होते हैं
(1) धनावेश
(2) ऋणावेश

धनावेश
सजातीय आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।
इलेक्ट्रॉनों की कमी के कारण उत्पन्न आवेश को धनावेश कहते हैं।

ऋणावेश
इलेक्ट्रॉनों की अधिकता के कारण उत्पन्न आवेश को ऋणावेश कहते हैं।

Q.2. तड़ित (Lightning) कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर- तंडित एक विशाल स्तर की विद्युत चिंगारी होती हैं यह चिंगारी बादलों में आवेश एकत्रित होने के कारण पैदा होती हैं। इसे हम अपनी भाषा में बिजली कड़कना भी कहते हैं। यह अक्सर बरसात के समय देखने मिलती है।
सन 1752 में अमेरिकी वैज्ञानिक Benjamin Franklin ने बताया कि तंडित तथा वस्त्रों उत्पन्न चिंगारी एक ही परिघटना है जो की आवेश अर्जित करने से उत्पन्न होती हैं।

Q.3. तड़ित चालक (Lightning Conductor) क्या है? इसका उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर- तंडित चालक एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग भवनों को तंडित के प्रभावों से बचाने के लिए किया जाता है।
किसी भवन के निर्माण के समय उसकी दीवारों में, उस भवन की ऊंचाई से अधिक लंबाई की धातु की छड़ स्थापित कर दी जाती हैं।
उपयोग
धातु की छड़ विद्युत आवेश को जमीन तक पहुंचाने के लिए कुछ सरल पथ प्रदान करती हैं।

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Q.4. भूकंप क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर- भूकंप के बारे में अभी भी सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं हो सका है।
पृथ्वी के अंदर उत्पन्न होने वाले कंपन से पृथ्वी की सतह के हिलने की घटना को भूकंप कहते हैं।
इससे पहले 26 जनवरी 2001 को गुजरात के भुज जिले में भूकंप आया था।

कारण
पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह की गहराई में गड़बड़ के कारण या भूस्पन्द/भूकंपन आते हैं।
पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत भूपर्पटी कहलाती हैं। यह टुकड़ों में विभाजित होती है।
इसके प्रत्येक टुकड़े को प्लेट कहते हैं। यह प्लेट निरंतर गति करती रहती हैं।

Q. 5. भूकंप के समय अपनाई जाने वाली सावधानियाँ लिखिए।
उत्तर- भूकंप के समय अपनाई जाने वाली सावधानियाँ
1. यदि आप घर में हैं, तो
किसी मेज के नीचे आश्रय लें तथा झटकों को के रुकने तक वही रहें।
ऐसी ऊंची तथा भारी वस्तुओं से दूर रहे जो आप पर गिर सकती हैं।
यदि बिस्तर पर हैं तो उठें नहीं अपने सर के तकिये से बचाव करें।

2. यदि आप घर से बाहर हैं, तो
भवनों, वृक्षों तथा ऊपर जाती विद्युत लाइनों से दूर रहे और कहीं खुले स्थान को खोजें एवं धरती पर लेट जाएं।
यदि कार अथवा बस में है, तो बाहर न निकले किसी खुले व सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास करें।

MCQ

1. तड़ित चालक का आविष्कार किसने किया था?
(अ) आइज़ैक न्यूटन
(ब) बेंजामिन फ्रैंकलिन
(स) थॉमस एडिसन
(द) गैलीलियो
उत्तर- (ब) बेंजामिन फ्रैंकलिन

2. समान आवेशों के बीच क्या होता है?
(अ) आकर्षण
(ब) प्रतिकर्षण
(स) कोई प्रभाव नहीं
(द) विद्युत धारा उत्पन्न होती है
उत्तर- (ब) प्रतिकर्षण

3. भूकंप की तीव्रता मापने के लिए किस पैमाने का उपयोग किया जाता है?
(अ) सेल्सियस पैमाना
(ब) रिच्टर पैमाना
(स) मीटर पैमाना
(द) न्यूटन पैमाना
उत्तर- (ब) रिच्टर पैमाना

4. निम्न में से कौन-सा स्थान तड़ित के समय सबसे सुरक्षित है?
(अ) खुला मैदान
(ब) ऊँचे पेड़ के नीचे
(स) पक्के भवन के अंदर
(द) जलाशय के पास
उत्तर- (स) पक्के भवन के अंदर

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