ध्वनि का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। जन्म से ही हम विभिन्न प्रकार की दुनिया सुनना प्रारंभ कर देते हैं। जैसे पक्षियों की चहचहाहट, पूजाघरों की घंटी, बांसुरी, तबला और हारमोनियम आदि वाद्य यंत्रों की ध्वनि सुनाई देती है।
ध्वनि की उत्पत्ति
• किसी भी वस्तु के कंपन करने से ध्वनि की उत्पत्ति होती है।
कंपन: किसी वस्तु की अपनी माध्य स्थित के इधर-उधर या आगे-पीछे होने वाली गति को ‘कंपन’ कहते हैं।
• जब कस कर तनिस के रबड़ के छल्ले को बीच में से खींचते हैं और खींच कर छोड़ते हैं तो यह कंपन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है।
जब यह कंपन करना बंद कर देता है तो ध्वनि बंद हो जाती हैं।
• कंपायनमनी वस्तुएं ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
• कुछ स्थितियों में कंपन हमें आसानी से दिखाई देता है। जब की कुछ स्थितियों में इनका आयाम इतना कम होता है कि हम इन्हें देख नहीं सकते परंतु हम इन कंपनों का अनुभव कर सकते हैं।
• विभिन्न वाद्य यंत्रों जैसे मंजीरा (झांझ), घरम एवं एकतारा आदि में भी कंपन द्वारा ही ध्वनि उत्पन्न होती है।
श्रव्य तथा अश्रव्य ध्वनियां
• जब हम किसी वाद्य यंत्र जैसे सितार के तार को कर्षित करते हैं तो हमें केवल तार की ही ध्वनि सुनाई नहीं देती है। वास्तव में संपूर्ण यंत्र कंपन करता है। और इस पूरे यंत्र के कंपन से उत्पन्न ध्वनि हमें सुनाई देती है।
मनुष्यों में उत्पन्न ध्वनि
मानव में ध्वनि, वाकयंत्र अथवा कांत द्वारा उत्पन्न होती हैं। हमारे कंठ में एक कठोर उभार होता है जिसे ‘वाकयंत्र’ कहते हैं। यह श्वास नली के ऊपरी सिरे पर होता है। वाकयंत्र या कंठ के आर-पार वाक्-तंतु इस प्रकार तानित होते हैं कि उनके बीच में वायु निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी बनी होती है।
जब फेफड़े वायु को बलपूर्वक झिरी से बाहर निकलते हैं तो वाक्-तंतु कंपित होते हैं जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
पुरुषों महिलाओं व बच्चों में वाक् तंतु की लंबाई अलग-अलग होती हैं। पुरुषों में यह 20mm महिलाओं में 15mm तथा बच्चों में बहुत छोटे होते हैं।
संबंधित- जंतुओं में जनन के महत्वपूर्ण नोट्स & प्रश्न-उत्तर
ध्वनि का संचरण
• ध्वनि को संचरण के लिए मध्य की आवश्यकता होती है।
• ध्वनि निर्वात में संचारित नहीं हो सकती।
(1) वायु में ध्वनि का संचरण
(2) द्रव में ध्वनि का संचरण
(3) ठोस में ध्वनि का संचरण
• कंपेयमान वस्तुएं ध्वनि उत्पन्न कर सकती हैं तथा यह किसी माध्यम में सभी दिशाओं में संचारित हो सकती है। यह माध्यम गैस, द्रव या ठोस हो सकता है।
मानव कान
कान के बाहरी भाग की आकृति कीप (फनल) जैसी होती हैं। जो आगे एक नलिका में खुलती हैं, जिसके सिरे पर एक पतली तानित झिल्ली होती हैं। इसे कर्ण पटह भी कहते हैं।
कर्ण पटह एक तानित रबड़ की शीट के समान होता है। ध्वनि के कंपन कर्ण परत को कंपित करते हैं। कर्ण पटह कंपनों को अंतर कर्ण तक भेज देता है। वहां से यह संकेत मस्तिष्क तक भेजे जाते हैं और इस प्रकार हम ध्वनि को सुन सकते हैं।
ध्वनि के महत्त्वपूर्ण गुण
कंपन
किसी वस्तु का बार-बार अपनी मध्य स्थित के इधर-उधर आगे-पीछे गति करना कंपन कहलाता है।
इस गति को दोलन गति भी कहते हैं।
आवृत्ति
प्रति सेकंड होने वाले कंपनों/दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
आवृत्ति को हर्ट्ज में मापा जाता है। इसका संकेत h2 है।
आवर्तकाल
एक कंपन होने में लगने वाले समय को आवर्तकाल कहते हैं।
• आवर्तकाल का मात्रक सेकंड होता है।
प्रबलता
ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निर्भर करती हैं। जब आयाम कम/छोटा होता है तो ध्वनि मंद होती हैं।
• ध्वनि की प्रबलता ध्वनि उत्पन्न करने वाले कंपनों के आयाम के वर्ग के समानुपाती होती हैं।
• प्रबलता को डेसीबल (db) मात्रक द्वारा व्यक्त करते हैं।
संबंधित- कोशिका – संरचना एवं कार्य के सम्पूर्ण नोट्स
तारत्व
धातु के बर्तनों को बजाने पर अप्रिय व मोटी ध्वनि उत्पन्न होती हैं। जबकि बांसुरी को बजाने पर मधुर व कर्णप्रिय ध्वनि उत्पन्न होती हैं।
• ध्वनि के तीक्ष्ण (महीन) अथवा भारी (मोटी) होने के लक्षण को तारत्व कहते हैं।
• तारत्व कंपनियों की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
• तारत्व यह आवृत्ति अधिक होने के कारण महिलाओं एवं बच्चों की आवाज पुरुषों की तुलना में सूरीली व बारीक होती हैं।
• पक्षियों की आवाज का तारत्व उच्च तथा शेर की दहाड़ का तारत्व कम होता है।
श्रव्य ध्वनि
मानव कान लगभग 20 Hz से 20000 Hz तक की आवृत्ति वाले ध्वनि को सुन सकते हैं, इसे द्रव्य ध्वनि कहते हैं।
अश्रव्य ध्वनि
20 Hz से कम आवृत्ति की ध्वनियां मानव कान द्वारा सुनाई नहीं दी जाती हैं, इसे अश्रव्य ध्वनि कहते हैं।
पराश्रव्य ध्वनि
कुछ जंतु 20000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनि को पराश्रव्य अल्ट्रसोसक ध्वनि कहते हैं।
जैसे- कुत्ते, चमगादड़, व्हेल आदि।
चिकित्सा उपकरण जैसे सोनोग्राफी मशीन में भी पराश्रव्य ध्वनि का प्रयोग किया जाता है।
शोर तथा संगीत
शोर
वह ध्वनि जो कानों को अप्रिय लगती हैं तथा कष्ट पहुंचाती हैं शोर कहलाती हैं।
जैसे यातायात के साधनों से उत्पन्न ध्वनि, अत्यंत प्रबल ध्वनि, युक्त संगीत, निर्माण स्थल से आने वाली ध्वनि।
संगीत
वह ध्वनि जो कानों को प्रिय व सुखद लगती हैं, संगीत या सुस्वर ध्वनि कहते कहलाती हैं। हारमोनियम से उत्पन्न ध्वनि, रेडियो, संगीत की ध्वनि।
संबंधित- किशोरावस्था क्या है? सम्पूर्ण जानकारी
ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि की तीव्रता 50 डेसीबल तक होने पर हमें ध्वनि सामान्य व कानों को प्रिय लगती है।
50 से 80 डेसीबल की ध्वनि हम सहन कर सकते हैं।
80 डेसीबल से अधिक की ध्वनि असहज होती हैं।
वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियों को ‘ध्वनि प्रदूषण’ कहते हैं।
ध्वनि प्रदूषण के कारण
• वाहनों की ध्वनियाँ
• विस्फोट फटकों का शोर
• मशीनों का शोर
• लाउडस्पीकर
• रसोई घर के उपकरण व कूलर आदि।
ध्वनि प्रदूषण से होने वाली हानियां
स्वास्थ्य संबंधी समस्या जैसे- अनिंद्रा, अतितनाव (उच्च रक्तचाप), चिंता आदि उत्पन्न होती हैं।
लगातार प्रबल ध्वनि के प्रभाव में रहने से सुनने की क्षमता अस्थाई अथवा स्थाई रूप से कम हो जाती हैं।
ध्वनि प्रदूषण से दैनिक जीवन की गतिविधियां
जैसे- बच्चों की पढ़ाई, अस्पतालों का कार्य आदि प्रभावित होता है।
ध्वनि प्रदूषण को सीमित रखने के उपाय
1. यातायात के वाहनों औद्योगिक मशीनों तथा घरेलू विद्युत उपकरणों में शोर कम करने वाली युक्ति (साइलेंसर) का उपयोग किया जाना चाहिए।
2. शोर उत्पन्न करने वाले क्रियाकलाप आवासीय क्षेत्रों से दूर संचालित होने चाहिए।
3. टेलीविजन व लाउडस्पीकर की ध्वनि प्रबलता कम रखनी चाहिए।
4. सड़कों व भवनों के आस-पास पेड़ लगाने चाहिए ताकि ध्वनि अवशोषित हो सके।
5. स्वचालित वाहनों के हॉर्न का उपयोग कम से काम करना चाहिए।
श्रवण क्षति
कुछ बच्चों में जन्म से ही पूर्णतया श्रवण क्षति होती हैं या किसी बीमारी, चोट या उम्र के कारण आंशिक आवश्यकता उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे बच्चे इंगित भाषा (संकेत भाषा) की सीख कर प्रभावशाली ढंग से संप्रक्षण कर सकते हैं।
संबंधित- पौधों एवं जंतुओं का संरक्षण – सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
Q.1 विभिन्न वाद्य यंत्रों जैसे सितार और एकतारा आदि में ध्वनि किस प्रकार उत्पन्न होती है?
उत्तर- जब हम किसी वाद्य यंत्र जैसे सितार के तार को कर्षित करते हैं तो हमें केवल तार की ही ध्वनि सुनाई नहीं देती है। वास्तव में संपूर्ण यंत्र कंपन करता है। और इस पूरे यंत्र के कंपन से उत्पन्न ध्वनि हमें सुनाई देती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि विभिन्न वाद्य यंत्रों जैसे मंजीरा (झांझ), घरम एवं एकतारा आदि में भी कंपन द्वारा ही ध्वनि उत्पन्न होती है।
Q.2 ध्वनि संचरण को समझाइए?
उत्तर- ध्वनि संचरण
• ध्वनि को संचरण के लिए मध्य की आवश्यकता होती है।
• ध्वनि निर्वात में संचारित नहीं हो सकती।
(1) वायु में ध्वनि का संचरण
(2) द्रव में ध्वनि का संचरण
(3) ठोस में ध्वनि का संचरण
• कंपेयमान वस्तुएं ध्वनि उत्पन्न कर सकती हैं तथा यह किसी माध्यम में सभी दिशाओं में संचारित हो सकती है। यह माध्यम गैस, द्रव या ठोस हो सकता है।
Q.3 कर्ण पटह किसे कहते हैं?
उत्तर- कान के बाहरी भाग की आकृति कीप (फनल) जैसी होती हैं। जो आगे एक नलिका में खुलती हैं, जिसके सिरे पर एक पतली तानित झिल्ली होती हैं। इसे कर्ण पटह भी कहते हैं।
Q.4 इनमें से किन्ही तीन गुणों की परिभाषा लिखिए
• कम्पन
• आवृति
• आवृतकाल
• प्रबलता
• तारत्व
आवृत्ति
प्रति सेकंड होने वाले कंपनों/दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
• आवृत्ति को हर्ट्ज में मापा जाता है। इसका संकेत h2 है।
आवर्तकाल
एक कंपन होने में लगने वाले समय को आवर्तकाल कहते हैं।
• आवर्तकाल का मात्रक सेकंड होता है।
तारत्व
धातु के बर्तनों को बजाने पर अप्रिय व मोटी ध्वनि उत्पन्न होती हैं। जबकि बांसुरी को बजाने पर मधुर व कर्णप्रिय ध्वनि उत्पन्न होती हैं।
• ध्वनि के तीक्ष्ण (महीन) अथवा भारी (मोटी) होने के लक्षण को तारत्व कहते हैं।
• तारत्व कंपनियों की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
• तारत्व यह आवृत्ति अधिक होने के कारण महिलाओं एवं बच्चों की आवाज पुरुषों की तुलना में सूरीली व बारीक होती हैं।
• पक्षियों की आवाज का तारत्व उच्च तथा शेर की दहाड़ का तारत्व कम होता है।
Q.5 पराश्रव्य ध्वनि को समझाइए?
उत्तर- कुछ जंतु 20000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनि को पराश्रव्य अल्ट्रसोसक ध्वनि कहते हैं।
जैसे- कुत्ते, चमगादड़, व्हेल आदि।
Q.6 ध्वनि प्रदुषण के कारणों और उपाय को लिखिए।
उत्तर- ध्वनि प्रदूषण के कारण और उपाय
कारण
• वाहनों की ध्वनियाँ
• विस्फोट फटकों का शोर
• मशीनों का शोर
• लाउडस्पीकर
• रसोई घर के उपकरण व कूलर आदि।
उपाय
1. यातायात के वाहनों औद्योगिक मशीनों तथा घरेलू विद्युत उपकरणों में शोर कम करने वाली युक्ति (साइलेंसर) का उपयोग किया जाना चाहिए।
2. शोर उत्पन्न करने वाले क्रियाकलाप आवासीय क्षेत्रों से दूर संचालित होने चाहिए।
3. टेलीविजन व लाउडस्पीकर की ध्वनि प्रबलता कम रखनी चाहिए।
4. सड़कों व भवनों के आस-पास पेड़ लगाने चाहिए ताकि ध्वनि अवशोषित हो सके।
5. स्वचालित वाहनों के हॉर्न का उपयोग कम से काम करना चाहिए।
MCQ
Q.1 महिलाओं में वाक् तंतु की लंबाई होती है?
(अ) 18mm
(ब) 20mm
(स) 15mm
(द) 13mm
उत्तर- (स) 15mm
Q.2 प्रबलता का मात्रक है-
(अ) सेकंड
(ब) डेसिबल (db)
(स) हर्ट्ज (Hz)
(द) तार
उत्तर- (ब) डेसीबल (db)
Q.3 श्रव्य ध्वनि का हर्ट्ज है-
(अ) 10 Hz – 20 Hz
(ब) 20,000 Hz – 25,000 Hz
(स) 25,000 Hz – 30,000 Hz
(द) 20 Hz – 20,000 Hz
उत्तर- (द) 20 Hz – 20,000 Hz
Q.4 हमारे कान में उपस्थित झिल्ली को क्या कहते हैं?
(अ) दोलन
(ब) कर्ण पटह
(स) वाक् तंतु
(द) निर्वात
उत्तर- (ब) कर्ण पटह
यह भी पढ़ें
फसल उत्पादन एवं प्रबंधन के सम्पूर्ण नोट्स पढ़ें
सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु के महत्वपूर्ण नोट्स
पदार्थ: धातु एवं अधातु के सम्पूर्ण नोट्सन
