आरपीएससी आरएएस (RPSC RAS) मुख्य परीक्षा 2024-2025 का आयोजन 17 और 18 जून 2025 को किया गया था, जिसके सभी चारों आधिकारिक प्रश्न पत्र (Paper I, II, III, और IV) अब आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
नीचे दिए गए RPSC RAS मुख्य परीक्षा में आने वाले वर्णनात्मक महत्वपूर्ण 22 प्रश्नों को अपनी आसान हिंदी भाषा में पढ़े।
प्रश्न 1: राजस्थान की ‘त्याग-प्रथा’ को परिभाषित कीजिए।
विवाह के अवसर पर क्षत्रिय परिवारों द्वारा चारण, भाट और ढोली आदि जातियों को अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले उपहार या धन को त्याग-प्रथा कहते थे। अत्यधिक खर्च के कारण इस प्रथा पर 1841 ई. में जोधपुर राज्य ने सर्वप्रथम रोक लगाई थी।
प्रश्न 2: सिंधु घाटी सभ्यता की ‘नर्तकी प्रतिमा’ की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
• यह प्रतिमा कांस्य धातु से बनी है जिसे ‘लुप्त मोम विधि’ (Lost Wax Casting) द्वारा ढाला गया है।
• यह प्रतिमा त्रिभंग मुद्रा (Tribhanga Posture) में खड़ी है और इसके बाएं हाथ में चूड़ियां पहनी हुई हैं।
प्रश्न 3: मक्खलिपुत्र गोशाल कौन था?
मक्खलिपुत्र गोशाल ‘आजीवक सम्प्रदाय’ (Ajivika Sect) के संस्थापक थे। वह महावीर स्वामी के समकालीन थे और उनका सिद्धांत ‘नियतिवाद’ (Destiny) कहलाता था, जिसके अनुसार सब कुछ पहले से भाग्य के अधीन है।
प्रश्न 4: ‘मेवाड़ पुकार’ क्या था?
वर्ष 1921 में भील आंदोलन के दौरान आदिवासी नेता मोतीलाल तेजावत द्वारा मेवाड़ के महाराणा को सौंपी गई 21 सूत्रीय मांगों की सूची को ‘मेवाड़ पुकार’ कहा जाता है।
प्रश्न 5: मिरात-उल-अखबार के संपादक कौन थे?
इस प्रसिद्ध अखबार के संपादक राजा राममोहन राय थे। उन्होंने वर्ष 1822 में कोलकाता (कलकत्ता) से फारसी भाषा में इस साप्ताहिक समाचार पत्र का संपादन शुरू किया था।
प्रश्न 6: ‘रावणहत्था’ क्या है?
यह राजस्थान का एक अत्यंत प्राचीन पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र है। यह नारियल के आधे कटे खोल पर बकरे की खाल मढ़कर बनाया जाता है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से पाबूजी की फड़ बांचते समय भोपे करते हैं।
प्रश्न 7: कुवलयमाला (Kuvalayamala) ग्रंथ की रचना किसने और कब की थी?
इस प्रसिद्ध जैन ग्रंथ की रचना उद्योतन सूरि ने 778 ईस्वी (8वीं शताब्दी) में जालौर में की थी। इस ग्रंथ में 18 देशी भाषाओं का उल्लेख मिलता है, जिसमें ‘मरुभाषा’ भी शामिल है।
प्रश्न 8: बिजोलिया किसान आंदोलन की कोई दो मुख्य विशेषताएं लिखिए।
• यह भारत का सबसे लंबा चलने वाला (44 वर्ष, 1897-1941) पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन था।
• इस आंदोलन का सफल नेतृत्व मुख्य रूप से विजय सिंह पथिक और साधु सीताराम दास ने किया था।
प्रश्न 9: महाराणा कुंभा द्वारा रचित किन्हीं दो प्रमुख संगीत ग्रंथों के नाम लिखिए।
महाराणा कुंभा एक महान शासक होने के साथ-साथ संगीत के विद्वान थे। उनके मुख्य संगीत ग्रंथ हैं:
• संगीत राज
• संगीत मीमांसा (इसके अलावा ‘सूड़ प्रबंध’ भी प्रसिद्ध है)।
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प्रश्न 10: राजस्थानी संस्कृति में ‘तोरण’ का क्या महत्व है?
विवाह उत्सव के समय वधू के घर के मुख्य द्वार पर लटकाया जाने वाला लकड़ी का एक मांगलिक चिह्न होता है। दूल्हे द्वारा इस पर छड़ी या तलवार से स्पर्श करना विजय और स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न 11: केसरी सिंह बारहट द्वारा रचित ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ क्या था?
वर्ष 1903 में दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए केसरी सिंह बारहट ने मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह को डिंगल भाषा में 13 सोरठे लिखकर भेजे थे, जिन्हें ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ कहा जाता है। इसे पढ़कर महाराणा का स्वाभिमान जाग उठा और वे दिल्ली दरबार में शामिल नहीं हुए।
प्रश्न 12: राजस्थान के इतिहास में ‘गीदड़ नृत्य’ (Geedar Dance) की क्या विशेषताएं हैं?
यह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनूं, चुरू) का एक अत्यंत प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह केवल पुरुषों द्वारा होली के त्योहार के अवसर पर डांडा रोपण से लेकर धुलंडी तक किया जाता है। इसमें नगाड़ा मुख्य वाद्य यंत्र होता है।
प्रश्न 13: गैर-अस्तित्वकारी परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets – NPA) को परिभाषित कीजिए।
बैंक द्वारा दिया गया ऐसा ऋण या अग्रिम (Loan), जिस पर मूलधन या ब्याज का भुगतान 90 दिनों से अधिक की अवधि तक बकाया (Overdue) रहता है, उसे एनपीए (NPA) कहा जाता है। इसे बैंकों की फंसी हुई पूंजी भी कहते हैं।
प्रश्न 14: भारत के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा (Food Security) को समझाइये।
भारत में खाद्य सुरक्षा का तात्पर्य देश के सभी नागरिकों को हर समय पर्याप्त मात्रा में, पौष्टिक और वहनीय मूल्य पर खाद्यान्न (भोजन) की भौतिक और आर्थिक उपलब्धता सुनिश्चित कराने से है। इसके लिए सरकार ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA) चलाती है।
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प्रश्न 15: अर्जुन लाल सेठी कौन थे? राजस्थान के राजनैतिक जागरण में उनका क्या योगदान था?
जयपुर के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन लाल सेठी राजस्थान में क्रांतिकारी चेतना के जनक थे। उन्होंने जयपुर में ‘वर्धमान विद्यालय’ की स्थापना की, जो क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देने का मुख्य केंद्र बना। उन्होंने नारा दिया था— “यदि अर्जुन लाल नौकरी करेगा, तो अंग्रेजों को भारत से बाहर कौन निकालेगा।”
प्रश्न 16: विजय सिंह पथिक का मूल नाम क्या था और वे किस आंदोलन से जुड़े थे?
विजय सिंह पथिक का मूल नाम भूप सिंह था। वे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले थे, लेकिन उन्होंने राजस्थान के प्रसिद्ध बिजोलिया किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व किया और भारत में किसान आंदोलन के जनक कहलाए।
प्रश्न 17: मत्स्य संघ (Matsya Union) का गठन कब हुआ और इसमें कौन-सी रियासतें शामिल थीं?
मत्स्य संघ का गठन राजस्थान एकीकरण के प्रथम चरण में 18 मार्च 1948 को हुआ था। इसमें अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली (ABCD) रियासतें तथा नीमराना ठिकाना शामिल था। इसकी राजधानी अलवर बनाई गई थी।
प्रश्न 18: ब्रिटिश काल के दौरान राजस्थान में आए ‘छप्पनिया अकाल’ (Chappania Akal) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: विक्रम संवत 1956 (ईस्वी सन 1899-1900) में राजस्थान में पड़ा यह अब तक का सबसे भयानक त्रिकाल (अन्न, जल और चारे की कमी) था। प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ ब्रिटिश और रियासती सरकारों की लापरवाही के कारण इसमें लाखों लोग और मवेशी मारे गए थे, जिससे राजपूताना की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई थी।
प्रश्न 19: ‘प्रजामंडल आंदोलन’ से क्या तात्पर्य है? इसके मुख्य उद्देश्य क्या थे?
ब्रिटिश भारत के राष्ट्रीय आंदोलन से प्रेरित होकर राजस्थान की देशी रियासतों की जनता द्वारा वहां के राजाओं और जागीरदारों के कुशासन के खिलाफ चलाए गए आंदोलनों को प्रजामंडल आंदोलन कहा जाता है।
मुख्य उद्देश्य:
• रियासतों में उत्तरदायी शासन (Responsible Government) की स्थापना करना।
• नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना और जागीरदारों के आर्थिक शोषण (लाग-बाग, बेगार) को समाप्त करना।
• कागज और छापेखाने का आविष्कार: गुटेनबर्ग द्वारा प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से बाइबिल और अन्य दार्शनिक विचार आम भाषा में छपने लगे, जिससे चर्च का अंधविश्वास कमजोर हुआ।
• धर्मयुद्ध (Crusades): इन युद्धों के कारण यूरोपीय लोग पूर्वी संस्कृतियों और अरबों के उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान के संपर्क में आए, जिससे उनका दृष्टिकोण तार्किक बना।
प्रश्न 20: किन उद्देश्यों को लेकर महात्मा गांधी ने असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ किया?
महात्मा गांधी ने 1 अगस्त 1920 को निम्नलिखित तीन मुख्य उद्देश्यों को लेकर असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया था:
• स्वराज की प्राप्ति: भारत के लिए औपनिवेशिक स्वशासन या स्वराज हासिल करना।
• खिलाफत का मुद्दा: तुर्की के खलीफा के साथ हुए अन्याय के विरोध में भारतीय मुस्लिमों की मांगों का समर्थन करना और हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत करना।
• पंजाब के अन्यायों का विरोध (जलियांवाला बाग हत्याकांड): वर्ष 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार और रौलट एक्ट के दोषियों को सजा दिलवाना तथा ब्रिटिश सरकार की बर्बरता का विरोध करना।
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प्रश्न 21: यूरोप में पुनर्जागरण आन्दोलन के उद्भव के कारणों का परीक्षण कीजिए।
14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच यूरोप में हुए पुनर्जागरण (Renaissance) के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
• कुस्तुंतुनिया पर तुर्कों का अधिकार (1453 ई.): इसके कारण पूर्वी यूरोप के विद्वान, दार्शनिक और कलाकार अपने प्राचीन ज्ञान व पाण्डुलिपियों के साथ इटली आ गए, जिससे वैचारिक क्रांति हुई।
• व्यापारिक समृद्धि और नए नगरों का उदय: विदेशी व्यापार से यूरोप में एक समृद्ध मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिसने स्वतंत्र चिंतन, कला और साहित्योत्थान को आर्थिक रूप से संरक्षण दिया।
• कागज और छापेखाने का आविष्कार: गुटेनबर्ग द्वारा प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से बाइबिल और अन्य दार्शनिक विचार आम भाषा में छपने लगे, जिससे चर्च का अंधविश्वास कमजोर हुआ।
• धर्मयुद्ध (Crusades): इन युद्धों के कारण यूरोपीय लोग पूर्वी संस्कृतियों और अरबों के उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान के संपर्क में आए, जिससे उनका दृष्टिकोण तार्किक बना।
प्रश्न 22: प्रारम्भिक 20वीं शताब्दी के दौरान राजस्थान में राजनैतिक जागरण के कारणों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
20वीं शताब्दी के प्रारंभ में राजस्थान की रियासतों में सदियों से सोई जनता राजनीतिक रूप से जागरूक होने लगी, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
• कृषक असंतोष और किसान आंदोलन: जागीरदारों द्वारा लगाए गए अत्यधिक कर (लाग-बाग), बेगार प्रथा और आर्थिक शोषण के खिलाफ बिजोलिया (1897) और बेगूं जैसे किसान आंदोलनों ने आम जनता में अन्याय के खिलाफ लड़ने का साहस पैदा किया।
• समाचार पत्रों और क्रांतिकारी साहित्य का योगदान: ‘राजस्थान केसरी’, ‘तरुण राजस्थान’ और ‘नवीन राजस्थान’ जैसे समाचार पत्रों तथा विजय सिंह पथिक व केसरी सिंह बारहट के क्रांतिकारी साहित्य ने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना का संचार किया।
• सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन: स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज की गतिविधियों ने राजस्थान के लोगों में स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेशी के प्रति गौरव जगाया, जिससे राजनीतिक चेतना को बल मिला।
• सशस्त्र क्रांतिकारियों की गतिविधियां: अर्जुन लाल सेठी, राव गोपाल सिंह खरवा और बारहट परिवार (प्रताप सिंह व जोरावर सिंह) की क्रांतिकारी गतिविधियों और गुप्त संगठनों ने युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई।
• बाहरी घटनाओं का प्रभाव: प्रथम विश्व युद्ध से लौटे सैनिकों के अनुभव, देश में चल रहे महात्मा गांधी के राष्ट्रीय आंदोलनों (जैसे असहयोग आंदोलन) और पड़ोसी प्रांतों की राजनीतिक हलचलों ने स्थानीय लोगों को जागरूक किया।
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