जंतुओं में जनन Class 8 Science Notes | CBSE, RBSE & NCERT

जंतुओं में जनन (Reproduction in Animals) यह कक्षा 8 विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें जीवों की नई संतति उत्पन्न करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में जनन के प्रकार, लैंगिक जनन, निषेचन, युग्मनज, भ्रूण का विकास, आंतरिक एवं बाह्य निषेचन तथा विभिन्न जंतुओं में जनन की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया है। CBSE, RBSE एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए देखते हैं, यहाँ आपको जंतुओं में जनन अध्याय के सम्पूर्ण नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर तथा परीक्षा उपयोगी जानकारी सरल हिंदी भाषा में प्राप्त होगी।

जनन

संजीवों में अपने समान ही संतति उत्पन करने की प्रक्रिया जनन कहलाती है.

• य़ह प्रक्रिया पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है ताकि जातियों का अस्तित्व तथा निरंतरता बनी रहें.

जनन के प्रकार

जंतुओं में जनन के दो प्रकार होते हैं.
(1) लैंगिक जनन
(2) अलैंगिक जनन

(1) लैंगिक जनन

अन्य जीवों कि तरह मनुष्यों में भी नर तथा मादा जननांग पाए जाते हैं, नर तथा मादा युग्मक का संलग्न, लैंगिक जनन कहलाता हैं.
• पौधों की तरह जंतुओं में भी नर व मादा जनन अंग पाए जाते हैं, जिनमें नर व मादा युग्मक बनते हैं.

• ये युग्मक संलग्न होकर युग्मनज बनाते हैं, जिससे विकसित होकर नया जीव बनता है.

मानव में जनन तंत्र

(1) नर जनन तंत्र

• नर जनन अंगों में एक जोड़ी वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक शिश्न (लिंग) होते हैं.

• वृषण नर युग्मक उत्पन करते हैं. जिन्हें शुक्राणु कहते हैं. वृषण लाखों शुक्राणु उत्पन्न है.

• शुक्राणु आकार में बहुत सूक्ष्म होते हैं. प्रत्येक शुक्राणु में एक सिर, एक मध्य भाग एवं एक पूंछ होती है

• शुक्राणु एकल कोशिका होती हैं जिसमें कोशिका के सभी संघटक पाए जाते हैं

संबंधित- फसल उत्पादन एवं प्रबंधन के सम्पूर्ण नोट्स पढ़ें

(2) मादा जनन अंग

मादा जननांगों में एक जोड़ी अंडाशय, दो अण्डवाहिनी (डिम्बवाहिनी) तथा गर्भाशय होता है, अंडाशय मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं, जिसे अंडाणु (डिम्ब) कहते हैं.

• मानव (स्त्रियों) में प्रति माह दोनों अंडाशयों में से किसी एक अंडाशय से अण्डवाहिनी में होता हैं.

• गर्भाशय वह भाग होता है जहाँ शिशु का विकास होता हैं शुक्राणु कि तरह अंडाणु भी एकल कोशिका हैं

निषेचन

जनन का पहला चरण शुक्राणु और अंडाणु का संलग्न होता है

• जब शुक्राणु, अंडाणु के सम्पर्क में आते है तो इनमें से एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलग्न हो जाता है, शुक्राणु और अंडाणु का यह संलयन ‘निषेचन’ कहलाता है

• निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज़ का निर्माण होता है

निषेचन के प्रकार

निषेचन दो प्रकार का होता है
(1) आंतरिक निषेचन
(2) बाह्य निषेचन

(1) आंतरिक निषेचन

वह निषेचन जो मादा के शरीर के अंदर होता है, आंतरिक निषेचन कहलाता है

• मनुष्य, गाय, कुत्ते तथा मुर्गी आदि अनेक जंतुओं में आंतरिक निषेचन होता है

(2) बाह्य निषेचन

वह निषेचन जो मादा के शरीर से बाहर जल में होता है बाह्य निषेचन कहलाता है

• मेंढक मछली स्टारफिश आदि में बाह्य निषेचन पाया जाता है

संबंधित- सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु के महत्वपूर्ण नोट्स

परखनली शिशु

• कुछ स्त्रियों में अण्डवाहिनी अवरुद्ध होने के कारण शुक्राणु, अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते

• ऐसी स्थिति में डॉक्टर ताजा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करके उचित माध्यम में कुछ घण्टों के लिए एक साथ रखते हैं जिससे IVF (इनविट्रो निषेचन) अर्थात शरीर से बाहर कृत्रिम निषेचन हो सके

• यदि निषेचन हो जाता है तो युग्मनज को लगभग एक हफ्ते तक विकसित किया जाता है

• इसके पश्चात उसे माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है

• जहां शिशु का पूर्ण विकास व जन्म सामान्य शिशु की तरह ही होता है

• इस तकनीकी द्वारा शिशु को परखनली शिशु कहते हैं

भ्रूण का परिवर्धन

• निषेचन के परिणामस्वरुप युग्मनज बनता है

• यह युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं के गोले में बदल जाता है

• इसके बाद कोशिकाएं समुहीकृत होने लगती है तथा विभिन्न उत्तकों और अंगों में परिवर्धित हो जाती है इस विकसित होती हुई सरंचना को भ्रुण कहते हैं
यह भ्रूण गर्भाशय की दीवार में रोपित होकर विकसित होता रहता है

• धीरे धीरे भ्रूण में विभिन्न शारीरिक अंग जैसे हाथ, पैर, सिर आंखें का इत्यादि विकसित हो जाते हैं

• भ्रूण की वह अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सकती है गर्भ कहलाता है

• जब गर्भ का विकास पूरा हो जाता है तो माँ नवजात शिशु को जन्म देती है

जरायूज़ एवं अंडप्रजक जंतु

• वे जंतु जो सीधे ही शिशु को जन्म देते हैं जरायूज़ जंतु कहलाते हैं
जैसे- मनुष्य, गाय, बकरी आदि

• वे जंतु जो अंडे देते हैं और अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं
जैसे- मुर्गी, छिपकली, तितली आदि

संबंधित- संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक अध्याय के नोट्स

शिशु से वयस्क

• नवजात जन्मे प्राणी अथवा अंडे से प्रस्फुटन से निकले प्राणी, तब तक वृद्धि करते रहते हैं जब तक वे वयस्क नहीं हो जाते


रेशम कीट में जीवन चक्र

अंडा -> लारवा(इल्ली)->प्यूपा -> वयस्क

(2) अलैंगिक जनन

वह जनन जिसमें केवल एक ही जनक नए जीव को जन्म देता है, अलैंगिक जनन कहलाता है

• अत्यंत छोटे जीव जैसे- हाइड्रा, अमीबा आदि में अलैंगिक जनन पाया जाता है

हाइड्रा में जनन

हाइड्रा में एक या अधिक उभार विकसित होते हैं यह उभार विकसित होते हुए नए जीव हैं, इन्हें मुकुल कहते हैं. इन मुकुलन से नया जीव विकसित होता है इसलिए इस प्रकार के जनन को मुकुलन कहते हैं

अमीबा में जनन

अमीबा एककोशिकीय जीव होता है जनन के समय इसका केंद्रक दो भागों में विभाजित होता है इसके बाद यह कोशिका भी दो भागों में विभाजित हो जाती है

• जिसके प्रत्येक भाग में केंद्रक होता है इस प्रकार एक जनक से दो अमीबा बनते हैं

• अलैंगिक जनन की वह विधि जिसमें एक जीव विभाजित होकर दो संतति उत्पन्न करता है, द्विखंडन कहलाता है

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

Q.1 सजीवों के लिए जनन क्यों महत्वपूर्ण है समझाइए

उत्तर- जनन एक जैविक प्रक्रिया है जो की जीवो द्वारा संतानोत्पति के लिए की जाती है सभी जीव अपनी प्रजातियों की संख्या और निरंतरता बनाए रखने के लिए जनन करते हैं

Q.2 मनुष्य में निषेचन प्रक्रम को समझाइए

उत्तर- शुक्राणु जब अंडाणु के संपर्क में आते हैं तो उसमें से एक शुक्राणु, अंडाणु के साथ संलग्न हो जाता है शुक्राणु और अंडाणु का यह संलग्न निषेचन कहलाता है निषेचन के परिणाम स्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है जो विकसित होकर भ्रूण में परिवर्धित होता है

संबंधित- पदार्थ: धातु एवं अधातु के सम्पूर्ण नोट्स

Q.3 युग्मनज और गर्भ में दो अंतर दीजिए

उत्तर-
युग्मनज: इसका निर्माण शुक्राणु और अंडाणु के संलग्न से होता है
युग्मनज विकसित होकर भ्रूण का निर्माण करता है

गर्भ: यह भ्रूण की वह अवस्था है जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सकती है
गर्भ पूर्ण विकसित होने पर नवजात शिशु का जन्म होता है

Q.4 अलैंगिक जनन की परिभाषा लिखिए

उत्तर- अलैंगिक जनन – वह जनन जिसमें केवल एक ही जनक नए जीव को जन्म देता है, अलैंगिक जनन कहलाता है
अत्यंत छोटे जीव जैसे- हाइड्रा, अमीबा आदि में अलैंगिक जनन पाया जाता है

Q.5 कायांतरण किसे कहते हैं उदाहरण दीजिए

उत्तर- लारवा का कुछ विशेष व तीव्र परिवर्तनों के साथ व्यस्क में परिवर्तित होना कायांतरण कहलाता है

जैसे- रेंगने वाले कैटरपिलर (लारवा) का उड़ने वाली तितली में परिवर्तित होना

Q.6 निषेचन की परिभाषा लिखिए

उत्तर- जब शुक्राणु, अंडाणु के सम्पर्क में आते है तो इनमें से एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलग्न हो जाता है, शुक्राणु और अंडाणु का यह संलयन ‘निषेचन’ कहलाता है

Q.7 आंतरिक निषेचन और बाह्य निषेचन में अंतर दीजिए

उत्तर-

(1) आंतरिक निषेचन: वह निषेचन जो मादा के शरीर के अंदर होता है, आंतरिक निषेचन कहलाता है जैसे- मनुष्य, गाय, कुत्ते तथा मुर्गी आदि

(2) बाह्य निषेचन: वह निषेचन जो मादा के शरीर से बाहर जल में होता है, बाह्य निषेचन कहलाता है जैसे मेंढक मछली स्टारफिश आदि

Q.8 परखनली शिशु को समझाइए

उत्तर- कुछ स्त्रियों में अण्डवाहिनी अवरुद्ध होने के कारण शुक्राणु, अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते
ऐसी स्थिति में डॉक्टर ताजा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करके उचित माध्यम में कुछ घण्टों के लिए एक साथ रखते हैं, जिससे IVF (इनविट्रो निषेचन) अर्थात शरीर से बाहर कृत्रिम निषेचन हो सके यदि निषेचन हो जाता है तो युग्मनज को लगभग एक हफ्ते तक विकसित किया जाता है इसके पश्चात उसे माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है जहां शिशु का पूर्ण विकास व जन्म सामान्य शिशु की तरह ही होता है
इस तकनीकी द्वारा शिशु को ‘परखनली शिशु’ कहते हैं

सही उत्तर चुनिए-

Q.1 आंतरिक निषेचन होता है
(अ) मादा के शरीर में
(ब) मादा के शरीर से बाहर
(स) के शरीर में
(द) नर के शरीर के बाहर

उत्तर- (अ) मादा के शरीर में


Q.2 एक युग्मनज़ में पाए जाने वाले केंद्रकों की संख्या होती है
(अ) एक
(ब) चार
(स) दो
(द) कोई नहीं

उत्तर- (स) दो

Q. 3 वे जंतु जो सीधे ही शिशु को जन्म देते हैं, वे कहलाते हैं-

(अ )अंडप्रजक जंतु

(ब) परखनली जंतु

(स) बाह्य जंतु

(द) जरायूज़ जंतु

उत्तर- (द) जरायूज़ जंतु

Q.4 निम्न एककोशिकीय जीव है-

(अ) अमीबा

(ब) मछली

(स) पक्षी

(द) कुत्ता

उत्तर- (अ) अमीबा

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top