मुख्य बिंदु
1. बल
2. बल के नियम
3. बल के प्रकार
(1) सम्पर्क बल
• पेशिय बल
• घर्षण बल
(2) असम्पर्क बल
• चुंबकीय बल
• स्थिर वैद्युत बल
• गुरुत्वाकर्षण बल
4. दाब
• वायुमंडलीय दाब
कक्षा 8 के “बल तथा दाब” अध्याय में हम बल उत्पन्न होने वाली क्रियाएं जैसे- किसी बक्से, अलमारी या भारी वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए हम उन्हें खींचते या धक्का देते हैं अथवा जमीन पर लुढ़कती हुई गेंद कुछ समय पश्चात धीमी होकर रुक जाती या अपनी दिशा परिवर्तित कर लेती है इन सभी स्थितियों में बल अपना प्रभाव डालता है लिए हम इस अध्याय में बल तथा दाब को उनके प्रकारों और परिभाषाओं के साथ समझते हैं।
बल
किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के (अभिकर्षण) या खिंचाव (आकर्षण) को बल कहते हैं।
बल के नियम
अभिकर्षण: किसी वस्तु को गति में लाने के लिए उसे अपने शारीरिक बल द्वारा खींचना अभिकर्षण बल कहलाता है।
अपकर्षण: अभिकर्षण के विपरीत किसी वस्तु को गति में लाने के लिए उसे अपने शारीरिक बल द्वारा धक्का देना अपकर्षण बल कहलाता है।
• किसी क्रिया में बल लगने के लिए कम से कम दो वस्तुओं के बीच अन्योन्यक्रिया होनी आवश्यक है।
• बल हमेशा अन्योन्यक्रिया के कारण लगता है।
उदाहरण के तौर पर
कोई आदमी स्थिर कार के पीछे खड़ा है। इस स्थिति में कार स्थिर ही रहती है। जब आदमी कार को धक्का लगाना प्रारंभ करता है, अर्थात कार पर अपना शारीरिक बल लगाता है, तो कार लगाए गए बल की दिशा में गति करना प्रारंभ कर देती है।
इसलिए हम कह सकते हैं कि बल अन्योन्यक्रिया के कारण लगता है।
• किसी वस्तु पर एक ही दिशा में लगाए गए बल जुड़ जाते हैं।
• यदि किसी वस्तु पर दो बल अलग-अलग दिशा में कार्य करते हैं। तो इस पर लगने वाला कुल (नेट) बल दोनों बलों के अंतर के बराबर होता है।
• बल किसी दूसरे बल से बड़ा, छोटा या बराबर का हो सकता हैं।
• अगर बल की दिशा या परिमाण में परिवर्तन होने पर इसका प्रभाव भी बदल जाता है।
• किसी वस्तु पर जब चाल गति शून्य होती है तथा उस पर बल लगाने पर वह गतिशील हो जाती है।
• किसी गतिशील वस्तु पर बल लगाकर उसे रोका जा सकता है।
• किसी वस्तु पर लगाया गया बल वस्तु की गति की दिशा में है, तो वस्तु की चाल बढ़ जाती है।
• और यदि वस्तु पर लगाया गया बल दिशा के विपरीत है तो वस्तु की चाल कम हो जाती है।
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बल के प्रकार
(1) संपर्क बल
किसी संपर्क की वस्तुओं के मध्य लगने वाला बल ‘संपर्क बल’ कहलाता है।
संपर्क बल दो प्रकार होता हैं।
• पेशीय बल
• घर्षण बल
● पेशीय बल
वस्तुओं को उठाते धकेलते या खींचते समय बल हमारे शरीर की मांसपेशियों द्वारा लगता है, अर्थात हमारी मांसपेशियों के क्रिया स्वरूप लगने वाले बल को ‘पेशीय बल‘ कहते हैं।
• मनुष्य में श्वसन क्रिया में वायु अंदर लेना तथा बाहर निकलते समय फेफड़े फैलते और सिकुड़ते हैं। इस प्रक्रिया में भी पेशीय बल लगता है।
• पेशीय बल तब ही कार्य करता है, जब पेशियां किसी वस्तु के संपर्क में हो इसलिए हम इसे संपर्क बल भी कहते हैं।
● घर्षण बल
किसी गतिशील अथवा लुढ़कने वाली वस्तु को बिना किसी शारीरिक तथा वस्तु द्वारा रोके ही धीमी गति होकर अपने आप रुक जाना घर्षण बल कहलाता है।
जैसे-
• फर्श पर लुढ़कने वाली गेंद धीरे-धीरे धीमी होकर अंत में रुक जाती है।
• किसी कार या स्कूटर के इंजन को बंद कर देने पर वह कुछ समय बाद धीमी गति होकर रुक जाता है।
• इन स्थितियों में वस्तुओं की गति की अवस्था में परिवर्तन का करण घर्षण बल है।
• फर्श तथा गेंद की सतहों के बीच लगने वाला घर्षण बल ही गतिशील वस्तुओं अथवा गेंद को विराम अवस्था में लाता है।
• घर्षण बल भी दो सतहों के बीच संपर्क के कारण संपन्न होता है, इसलिए यह बल भी ‘संपर्क बल’ कहलाता है।
• घर्षण बल सभी गतिशील वस्तुओं पर लगता है और इसकी दिशा सदैव गति की दिशा के विपरीत होती है।
(2) असंपर्क बल
जब बल दो ऐसी वस्तुओं के मध्य लग रहा हो, जो एक-दूसरे के संपर्क में नहीं हो, तो ऐसा बल असंपर्क बल कहलाता है।
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असंपर्क बल के तीन प्रकार होते हैं-
● चुंबकीय बल
● स्थिरवैद्युत बल
● गुरुत्वाकर्षण बल
● चुंबकीय बल
जब एक चुंबक दूसरे चुंबक पर बिना संपर्क में आए ही बल लग जा सकता है अतः चुंबक द्वारा लगाया गया बल चुंबकीय या असंपर्क बल कहलाता है।
• दो चुंबकों के समान ध्रुव, एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा असमान ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।
• चुंबक अथवा लोहे के टुकड़े पर लगाया गया बल भी असंपर्क बल है।
● स्थिरवैद्युत बल
एक आवेशित वस्तु (बिना आवेश वाली) द्वारा, किसी दूसरी आवेशित या अनावेशित वस्तु पर लगाया गया बल ‘स्थिरवैद्युत बल‘ कहलाता है।
• यह बल वस्तुओं के संपर्क में आए बिना भी कार्य करता है, अतः यह भी असंपर्क बल कहलाता है।
● गुरुत्वाकर्षण बल
• कोई वस्तु जैसे- सिक्का अथवा पेन हाथ से छुटने पर धरती की ओर गिरती हैं।
• इसी प्रकार फल और पत्तियां पेड़ से अलग होने के पश्चात धरती की ओर आते हैं।
• यह वस्तुएं पृथ्वी की ओर इसलिए गिरती है, क्योंकि पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, इस बल को गुरुत्व या गुरुत्व बल कहते हैं।
• गुरुत्व बल एक आकर्षण बल है जो प्रत्येक वस्तु पर लगता है।
• पृथ्वी के संपर्क में आए बिना ही पृथ्वी वस्तुओं को आकर्षित कर रही हैं, अतः इसे भी असंपर्क बल कहते हैं।
• गुरुत्व बल केवल पृथ्वी का ही गुण नहीं है। बल्कि पूरे विश्व में सभी वस्तुएं चाहे वह छोटी हो या बड़ी, वे एक दूसरे के ऊपर बल लगाती हैं, यह बल ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ कहलाता है।
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दाब
किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
बल
दाब = ——————————-
क्षेत्रफल जिस पर यह लगता है
• पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना कम होगा उस पर दाब उतना अधिक होगा।
• गुब्बारे को फूलाने पर गुब्बारे में सुराख के कारण वायु बाहर आती है, व गुब्बारा फूलता नहीं है।
• इसी प्रकार साइकिल की ट्यूब में पंचर होने पर अंदर की हवा बाहर निकल जाती है।
• वायु फुलाए हुए गुब्बारे या साइकिल की ट्यूब की अंदर की दीवारों पर दाब डालती है।
• गैसें जी बर्तन में रखी जाती है, उसकी दीवारों पर दाब डालती है।
वायुमंडलीय दाब
• वायु पृथ्वी के तल से कई किलोमीटर ऊपर तक फैली हुई है। इस वायु द्वारा लगाएं गए दाब को ‘वायुमंडलीय दाब‘ कहते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
Q.1 बल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के (अभिकर्षण) या खिंचाव (आकर्षण) को बल कहते हैं।
किसी क्रिया में बल लगने के लिए कम से कम दो वस्तुओं के बीच अन्योन्यक्रिया होनी आवश्यक है। बल हमेशा अन्योन्यक्रिया के कारण लगता है।
कोई आदमी स्थिर कार के पीछे खड़ा है। इस स्थिति में कार स्थिर ही रहती है। जब आदमी कार को धक्का लगाना प्रारंभ करता है, अर्थात कार पर अपना शारीरिक बल लगाता है, तो कार लगाए गए बल की दिशा में गति करना प्रारंभ कर देती है।
इसलिए हम कह सकते हैं कि बल अन्योन्यक्रिया के कारण लगता है।
Q.2 पेशीय तथा गुरुत्वाकर्षण बल को समझाइए।
उत्तर- पेशीय बल एक संपर्क बल है तथा गुरुत्वाकर्षण असंपर्क बल है।
अंतर-
1. पेशीय बल
पेशीय बल तब ही कार्य करता है, जब पेशियां किसी वस्तु के संपर्क में हो इसलिए हम इसे संपर्क बल भी कहते हैं।
वस्तुओं को उठाते धकेलते या खींचते समय बल हमारे शरीर की मांसपेशियों द्वारा लगता है, अर्थात हमारी मांसपेशियों के क्रिया स्वरूप लगने वाले बल को ‘पेशीय बल’ कहते हैं।
2. गुरुत्वाकर्षण बल
गुरुत्व बल एक आकर्षण बल है जो प्रत्येक वस्तु पर लगता है। पृथ्वी के संपर्क में आए बिना ही पृथ्वी वस्तुओं को आकर्षित कर रही हैं, अतः इसे भी असंपर्क बल कहते हैं।
गुरुत्व बल केवल पृथ्वी का ही गुण नहीं है। बल्कि विश्व में सभी वस्तुएं चाहे वह छोटी हो या बड़ी, वे एक-दूसरे के ऊपर बल लगाती हैं, यह बल ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ कहलाता है।
Q.3 दाब क्या है? समझाइए।
उत्तर- किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को ‘दाब’ कहते हैं। पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना कम होगा उस पर दाब उतना अधिक होगा।
वायु फुलाए हुए गुब्बारे या साइकिल की ट्यूब की अंदर की दीवारों पर दाब डालती है।
वायुमंडलीय दाब
वायु पृथ्वी के तल से कई किलोमीटर ऊपर तक फैली हुई है। इस वायु द्वारा लगाएं गए दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
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MCQ
Q.1 निम्न में अभिकर्षण का अर्थ है-
(अ) खींचना
(ब) ऊपर उठाना
(स) धक्का लगाना
(द) नीचे गिराना
उत्तर- (स) धक्का लगाना
Q.2 ‘पेड़ से फल का गिरना’ वाक्य में कौन सा बल सम्मिलित हैं?
(अ) घर्षण बल
(ब) चुंबकीय बल
(स) सम्पर्क बल
(द) गुरुत्वाकर्षण बल
उत्तर- (द) गुरुत्वाकर्षण बल
Q.3 ‘फेफड़ों का फैलना तथा सिकुड़ना’ निम्न में कौन सा बल प्रचलित है
(अ) पेशीय बल
(ब) स्थिरवैद्युत बल
(स) घर्षण बल
(द) असम्पर्क बल
उत्तर- (अ) पेशीय बल
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