हमारी पृथ्वी पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतु हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण भाग है। ये प्रकृति में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या, वनों की कटाई, प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण अनेक पौधों और जंतुओं की प्रजातियां संकट में पड़ गई है इसलिए पौधों और जंतुओं का संरक्षण अत्यधिक आवश्यक हैं इस अध्याय में हम वनोंन्मूलन, वन्य जीव अभ्यारण, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यप्राणी अभ्यारण, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तथा संकटापन्न जंतु के लिए महत्व के बारे में अध्ययन करेंगे।
वनोंमूलन क्या है?
मानव जनित प्राकृतिक कारणों से वनों का विनाश वनोन्मूलन कहलाता हैं।
• काग़ज़ निर्माण के लिए वनों की कटाई भी वनोंमूलन है।
• एक टन कागज प्राप्त करने के लिए 17 विकसित वृक्षों को काटा जाता है, अतः हमें कागज की बचत करनी चाहिए।
वनोन्मूलन के कारण
• कृषि के लिए प्राप्त करना।
• घरों एवं कारखानों के निर्माण के लिए भूमि प्राप्त करना।
• फर्नीचर बनाने अथवा लकड़ी की ईंधन के रूप में उपयोग
• पशुओं द्वारा वनों का अतिचरण।
• दावानल एवं भयंकर सूखा।
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वनोंमूलन के दूष्प्रभाव
1. वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में वृद्धि- पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उपयोग में लेते हैं, जिससे वायु में CO₂ का स्तर वायुमंडल में बढ रहा है।
2. विश्व ऊष्ण (Global Warming) पृथ्वी के ताप में वृद्धि होती है। पृथ्वी के ताप में वृद्धि के कारण जल चक्र का संतुलन बिगड़ता है, और वर्षा दर में कमी आती है, जिससे सूखा पड़ता है।
3. वनोंमूलन में मृदा की जनधारण क्षमता तथा जल के भूमि में नीचे की और अंतः श्रावण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आती है।
4. पेड़- पौधों की जड़े मृदा को दृढ़ता से बाँधे रखती है। इनकी कटाई से मृदा को ढीली पड़ जाती है, तथा तेज हवा अथवा जल बहाव के साथ बहकर चली जाती है। मृदा की उपजाऊ परतें बह जाने से (मृदा अपरदन) धीरे- धीरे उर्वरक भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है, इसे मरुस्थलीकरण कहते हैं।
5. पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षों की कमी से मृदा की दृढ़ता से बाँधने की क्षमता समाप्त हो रही हैं, जिससे चट्टानें खिसकने की घटना बढ़ रही है।
6. जंतुओं पक्षियों और पादपों की विभिन्न प्रजातियों के लिए वन एक प्राकृतिक उत्तम आवास है, वनों के विनाश इनकी कई प्रजातियाँ दुर्बल एवं विलुप्त हो रही हैं।
वनोंमूलन का निवारण
पुनर्वनरोपण
• पुनर्वनरोपण का उद्देश्य काटे गए वृक्षों का रोपण करना है।
• प्राकृतिक रूप से भी वन का पुनर्वणरोपण हो जाता है।
• वनों का संरक्षण एवं परिरक्षण करने के उद्देश्य से भारत में भारतीय वन अधिनियम में 1927 में लागु किया गया।
वन एवं वन्यप्राणियों का संरक्षण
• प्राकृतिक एवं मानव जनित गतिविधियों में वातावरण में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। इस कारण वन एवं अन्य जीवों के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। अतः इसका संरक्षण करना आवश्यक हो गया है।
• हमारे व्यक्तिगत प्रयासों एवं समाज के प्रयासों के अतिरिक्त सरकारी एजेंसियाँ भी वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु नियम विधियाँ और नीतियाँ बनाती हैं।
• केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा वन्य जीव अभ्यारण, राष्ट्रीय उद्यान व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए जाते हैं, जहाँ वन एवं वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं। इन क्षेत्रों में वृक्षारोपण कृषि चारागाहा वृक्षों की कटाई, शिकार आदि गतिविधियाँ निपिध्द होती हैं।
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वन्यजीव संरक्षण
वह क्षेत्र जहाँ जीव-जंतु एवं उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते है, उसे वन्यजीव संरक्षण कहलाता है।
जैसे- इसमें पौधे, पशु, पक्षी, कीट आदि सभी शामिल होते हैं।
राजस्थान में तालछापर अभ्यारण (चूरू), गजनेर अभ्यारण (बीकानेर)
राष्ट्रीय उद्यान
वन्य जंतुओं के लिए आरक्षित क्षेत्र जहाँ वह स्वतंत्र रूप से आवास एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। ऐसे क्षेत्र/स्थान को राष्ट्रिय उद्दान कहते हैं।
जैसे- राजस्थान में केवलादेन राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर)।
जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र
वन्यजीव, पोधों, संसाधनों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारंपरिक ढंग से जीवनयापन हेतु विशाल क्षेत्र संरक्षित किए जाते हैं। यह क्षेत्र उस क्षेत्र की जैव विविधता संस्कृति को बनाए रखने में सहायक होती हैं।
• कुछ जंतु एवं पौधे एक क्षेत्र विशेष में पाए जाते हैं। किसी क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़- पौधे उस क्षेत्र के ‘वनस्पतिजात’एवं जीव- जंतु ‘प्राणिजात’ कहलाते है।
• पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में स्थित साल और जंगल आय के पेड़ तथा भारतीय विशाल गिलहरी इस क्षेत्र की विशेष क्षेत्री प्रजातियाँ हैं।
वन्यप्राणी अभयारण्य
ऐसे क्षेत्र जहाँ वन्यप्राणी सुरक्षित एवं संरक्षित रहते हैं, ‘वन्यप्राणी अभ्यारण्य’ कहलाते हैं।
• अभ्यारण्य में प्राणियों अथवा जंतुओं को मारना, शिकार करना अथवा पकड़ना पूर्णतः निषिद्ध एवं दंडनीय अपराध होता है।
• कुछ महत्वपूर्ण संकटापन्न वन्य जंतु जैसे- काला हिरण, श्वेत आँखों वाले हिरण, हाथी अजगर, गेंडा, गुलाबी सिर वाला बत्तख़ आदि वन्य प्राणी अभ्यारणों में सुरक्षित एवं संरक्षित होते हैं।
• संरक्षित वन भी जीवों के लिए सुरक्षित नहीं रहें क्योंकि इनके आस- पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देता है।
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संकटापन्न जंतु
• वनों की कटाई व वन्य जीवों के निरंतर शिकार के कारण कई वन्यजीव वनों से विलुप्त होते जा रहे हैं।
• वे जंतु जिसकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है, और वे विलुप्त हो सकते हैं।
जैसे- गोडावन, बारहसिंगा
• बड़े जंतुओं की अपेक्षा छोटे प्राणियों के विलुप्त होने कि संभावना अधिक होती है।
• ये जीव आकर में छोटे होते हैं, परंतु आहार श्रृंखला व आहार जाल में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
• ऐसी कई प्रजातियां हैं जो विलुप्त हो गई है, जिसको विलुप्त प्रजातियां कहते हैं।
रेड डाटा पुस्तक
• यह वह पुस्तक है, जिसमे सभी संकटापन्न जंतुओं और अन्य स्पीशिज का रिकॉर्ड रखा जाता है।
• पौधों, जंतुओं और अन्य स्पीशिज के लिए अलग- अलग ‘रेड डाटा पुस्तक’ है।
प्रवाह पक्षी
• जलवायु परिवर्तन के कारण जंतुओं (स्पीशिज) का अपने आवास से प्रतिवर्ष विशेष अवधि के लिए किसी दूसरे आवास में प्रजनन के लिए यात्रा करना, प्रवास कहलाता है।
• वे पक्षी जो उड़कर सुदूर क्षेत्रों तक लंबी यात्रा करते हैं, क्षेत्रों तक लंबी यात्रा करते हैं, प्रवासी पक्षी कहलाते हैं।
• राजस्थान में कुंरजा पक्षी एक प्रवासी पक्षी है।
कुरंजा पक्षी के महत्वपूर्ण प्रवास स्थल-
(1) फलौदी के पास खिचने, जोधपुर
(2) तालछापर, चूरू
(3) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान घना, भरतपुर
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महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
1. वनोन्मूलन किसे कहते हैं?
उत्तर- वनोन्मूलन का अर्थ है, वनों का समाप्त होना अर्थात् मानव जनित प्राकृतिक कारणों से वनों का विनाश ‘वनोन्मूलन’ कहलाता हैं।
2. वन्यजीव अभ्यारण क्या है?
उत्तर- वह क्षेत्र जो जंतु एवं अनेक आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ सुरक्षित रहते हैं, वह वन्यजीव अभयारण्य है।
3. वनोन्मूलन के दुष्प्रभावों को लिखिए?
उत्तर- वनोन्मूलन के दुष्प्रभाव-
• पौधे प्रकाश संश्लेषण कि क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उपयोग में लेते हैं, जिससे वायु में CO2 का स्तर वायुमंडल में बढ़ रहा है।
• पृथ्वी के ताप में वृद्धि के कारण जल चक्र का संतुलन बिगड़ता है और वर्षा दर में कमी आती है।
• वनोन्मूलन में मृदा कि जलधारणा क्षमता तथा जल कि भूमि के नीचे की और अंतः श्रावण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आती है।
• पेड़- पौधों की जड़े मृदा की दृढ़ता से बाँधे रखती हैं, इसकी कटाई से मृदा ढीली पड़ जाती है, तथा तेज हवा अथवा जल बहाव के साथ बहकर चली जाती है।
4. मृस्थलीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर- मृदा कि उपजाऊ परते बह जाने से धीरे-धीरे उर्वरक- भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है, जिसे मरुस्थलीकरण कहा जाता है।
5. वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण क्यों आवश्यक हो गया है?
उत्तर- प्राकृतिक एवं मानव जनित गतिविधियों में वातावरण तेजी से परिवर्तन हो रहा है। इस कारण वन एवं अन्य जीवों के अस्तित्व को ख़तरा उत्पन्न हो गया है। अतः इसका संरक्षण करना आवश्यक हो गया है।
6. राष्ट्रीय उद्दान किसे कहते हैं?
उत्तर- वन्य जंतुओं के लिए आरक्षित क्षेत्र जहाँ वह स्वतंत्र रूप से आवास एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, ऐसे क्षेत्र को ‘राष्ट्रीय उद्यान’ कहते है।
7. वनस्पतिजात या प्रणिपात क्या है?
उत्तर- कुछ जन्तु एवं पौधे एक क्षेत्र विशेष में पाए जाते हैं, किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़- पौधे उस क्षेत्र के वनस्पतिजात एवं जीव- जंतु ‘प्राणिजात’ कहलाते है।
8. संकटापन जंतु किसे कहते हैं?
उत्तर- वे जंतु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है। और वे विलुप्त हो सकते हैं, ‘संकटापनजंतु’ कहलाते हैं।
9. प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर- जलवायु परिवर्तन के कारण जंतुओं (स्पीशिज) का अपने आवास से प्रतिवर्ष विशेष अवधि के लिए किसी दूसरे आवास में प्रजनन के लिए यात्रा करना ‘प्रवास’ कहलाता हैं।
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MCQ
1. निम्न में वनोन्मूलन में सम्मिलित है-
(अ) पौधे लगाना
(ब) वनों में सफ़ाई
(स) कारखानों का निर्माण
(द) समतलीय वन
उत्तर- (स) कारखानों का निर्माण
2. राजस्थान में गजनेर अभ्यारण स्थित है-
(अ) सवाई माधोपुर
(ब) बीकानेर
(स) भरतपुर
(द) उदयपुर
उत्तर- (ब) बीकानेर
3. प्रकाश संश्लेषण कि क्रिया में निम्न में से वायुमंडल में किसका स्तर बढ़ रहा है-
(अ) कार्बन डाइऑक्साइड
(ब) ऑक्सीजन
(स) नाइट्रोजन
(द) लिथियम
उत्तर- (अ) कार्बन डाइऑक्साइड
4. संकटापन्न जंतुओं का रिकॉर्ड निम्न में किस पुस्तक में रखा जाता है?
(अ) वन संरक्षण पुस्तक
(ब) रेड डाटा पुस्तक
(स) जंतु संरक्षण पुस्तक
(द) वायु डाटा पुस्तक
उत्तर- (ब) रेड डाटा पुस्तक
5. निम्न में कुरंजा पक्षी का प्रवास स्थल नहीं है-
(अ) जोधपुर
(ब) तालछापर
(स) चूरू
(द) भरतपुर
उत्तर- (द) भरतपुर
6. भारतीय वन अधिनियम किस सन् में लागू किया गया था-
(अ) सन् 1921
(ब) सन् 1930
(स) सन् 1927
(द) सन् 1925
उत्तर- (स) सन् 1927
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